सीएम योगी के निर्देशों पर उच्च शिक्षा विभाग में बड़ा अभियान, ईंधन बचत और पर्यावरण संरक्षण को लेकर सक्रिय हुई सरकार

लखनऊ।
प्रदेश में ईंधन बचत, पर्यावरण संरक्षण और स्वदेशी उत्पादों को बढ़ावा देने को लेकर योगी सरकार अब मिशन मोड में नजर आ रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के वैश्विक परिस्थितियों और ऊर्जा संकट को देखते हुए किए गए आह्वान के बाद मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने सभी विभागों को विशेष निर्देश जारी किए हैं। इसी क्रम में गुरुवार को उच्च शिक्षा मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने विधानसभा स्थित कार्यालय में विभागीय अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण समीक्षा बैठक की और कई बड़े निर्देश दिए।

बैठक के दौरान मंत्री योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि देशहित में ऊर्जा संरक्षण अब केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं, बल्कि जनभागीदारी का अभियान बन चुका है। उन्होंने अधिकारियों और कर्मचारियों से सप्ताह में कम से कम एक दिन सार्वजनिक परिवहन का उपयोग करने की अपील करते हुए कहा कि इससे ईंधन की बचत होगी, प्रदूषण कम होगा और पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिलेगी।

उच्च शिक्षा मंत्री ने स्पष्ट निर्देश दिए कि विभागीय बैठकों को अधिक से अधिक वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से आयोजित किया जाए ताकि अनावश्यक यात्राओं पर रोक लग सके और समय के साथ संसाधनों की भी बचत हो। उन्होंने कहा कि डिजिटल कार्यप्रणाली अपनाना समय की आवश्यकता है और इससे प्रशासनिक कार्यों में पारदर्शिता एवं दक्षता भी बढ़ेगी।

योगेंद्र उपाध्याय ने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ चाहते हैं कि यह अभियान केवल सरकारी दफ्तरों तक सीमित न रहे, बल्कि विश्वविद्यालयों, महाविद्यालयों और शिक्षण संस्थानों के माध्यम से समाज के हर वर्ग तक पहुंचे। उन्होंने सभी कुलपतियों और शिक्षण संस्थानों से अपील की कि छात्र-छात्राओं को भी इस मुहिम से जोड़ा जाए ताकि नई पीढ़ी ऊर्जा संरक्षण और पर्यावरण सुरक्षा के प्रति जागरूक बन सके।

बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की “स्वदेशी अपनाओ और आत्मनिर्भर भारत मजबूत बनाओ” की सोच को भी प्रमुखता से रखा गया। मंत्री ने कहा कि यदि देश का हर नागरिक छोटे-छोटे बदलाव अपनाए तो ऊर्जा संकट और पर्यावरणीय चुनौतियों से काफी हद तक निपटा जा सकता है।

इस दौरान प्रमुख सचिव एम.पी. अग्रवाल, सचिव अमृत त्रिपाठी समेत प्रदेश के सभी राजकीय एवं निजी विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षा निदेशालय से जुड़े 100 से अधिक अधिकारियों ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से बैठक में भाग लिया। अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि वे अपने-अपने संस्थानों में इस अभियान को प्रभावी रूप से लागू करें और इसे जन-जागरूकता अभियान का स्वरूप दें।

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