मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग की बैठक सम्पन्न

मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग की बैठक सम्पन्न

गोशालाओं के प्रभावी प्रबंधन एवं गोवंश संरक्षण पर विशेष जोर, प्रत्येक जनपद में मॉडल गोशाला एवं बायोगैस मॉडल ग्राम विकसित करने के निर्देश

बायोगैस संयंत्रों के प्रभावी परिणाम सुनिश्चित करने एवं गोशालाओं के नियमित निरीक्षण अनुश्रवण की व्यवस्था सुदृढ़ करने पर जोर

आज मुख्यमंत्री आवास, लखनऊ में माननीय मुख्यमंत्री श्री योगी आदित्यनाथ जी की अध्यक्षता में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग की महत्वपूर्ण बैठक सम्पन्न हुई। बैठक में प्रदेश में संचालित गोशालाओं के प्रबंधन, गोवंश संरक्षण, प्राकृतिक कृषि, गोबर आधारित जैव ऊर्जा तथा गो-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के संबंध में विस्तृत समीक्षा एवं विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्री श्याम बिहारी गुप्ता, उपाध्यक्ष श्री अतुल सिंह एवं श्री महेश शुक्ल, सदस्य श्री राजेश सिंह सेंगर, श्री रमाकांत उपाध्याय एवं श्री दीपक गोयल उपस्थित रहे।

बैठक के दौरान माननीय मुख्यमंत्री जी ने निर्देश दिए कि उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग का प्राथमिक दायित्व प्रदेश की गोशालाओं की समुचित व्यवस्था, गोवंश के संरक्षण एवं उनके गुणवत्तापूर्ण रख-रखाव को प्रभावी ढंग से सुनिश्चित करना है। उन्होंने आयोग को निर्देशित किया कि प्रदेश की गोशालाओं का नियमित निरीक्षण, सतत अनुश्रवण एवं समीक्षा की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि गोवंश को निर्धारित मानकों के अनुरूप चारा, पेयजल, चिकित्सा एवं अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हों।

मुख्यमंत्री जी ने प्रत्येक जनपद में एक मॉडल गोशाला एवं एक बायोगैस आधारित मॉडल ग्राम विकसित करने की दिशा में चरणबद्ध एवं व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि गोशालाओं को गोवंश संरक्षण के साथ-साथ गो-आधारित प्राकृतिक कृषि, जैविक खाद, स्वच्छ ऊर्जा तथा ग्रामीण आजीविका से जोड़ते हुए उन्हें आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में कार्य किया जाना चाहिए। उन्होंने यह भी निर्देशित किया कि आयोग समयबद्ध रूप से गोशालाओं का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का मूल्यांकन करे तथा आवश्यक सुधारात्मक सुझाव शासन को उपलब्ध कराए, जिससे गोवंश संरक्षण की व्यवस्था और अधिक सुदृढ़ हो सके।

बैठक में बायोगैस संयंत्रों के प्रभावी परिणाम सुनिश्चित करने पर भी विशेष जोर दिया गया। इस दिशा में स्थापित संयंत्रों की नियमित निगरानी, तकनीकी दक्षता एवं संचालन व्यवस्था को सुदृढ़ करने तथा उनके माध्यम से गोबर के प्रभावी उपयोग, ऊर्जा उत्पादन एवं जैविक संसाधनों के बेहतर प्रबंधन को सुनिश्चित करने पर विचार-विमर्श किया गया।

बैठक में आईआईटी दिल्ली के प्रोफेसर डॉ. वी. के. विजय एवं उनकी टीम ने गोबर आधारित बायोगैस, जैविक उर्वरक तथा गो-आधारित तकनीकों के संबंध में अपने सुझाव प्रस्तुत किए। इसके साथ ही स्वदेशी शोध संस्थान एवं GCCI के प्रतिनिधियों ने भी बैठक में सहभागिता की। गोशालाओं को ऊर्जा एवं जैविक संसाधन उत्पादन केप्रभावी केंद्रों के रूप में विकसित करने तथा वैज्ञानिक एवं तकनीकी संस्थानों के सहयोग से गो-आधारित नवाचारों को बढ़ावा देने की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई।

बैठक में यह भी निर्णय लिया गया कि आयोग द्वारा प्रदेश की गोशालाओं के नियमित निरीक्षण, अनुश्रवण एवं व्यवस्थाओं के मूल्यांकन की प्रक्रिया को और अधिक प्रभावी बनाया जाएगा तथा आवश्यक सुधारात्मक कार्यवाहियों के माध्यम से गोवंश संरक्षण कार्यक्रमों का अपेक्षित लाभ धरातल पर सुनिश्चित किया जाएगा।

बैठक में आयोग द्वारा मुख्यमंत्री जी को अवगत कराया गया कि उनके मार्गदर्शन के अनुरूप प्रदेश की गोशालाओं के नियमित निरीक्षण एवं अनुश्रवण की व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ किया जाएगा। साथ ही, गोवंश संरक्षण, मॉडल गोशालाओं, बायोगैस आधारित मॉडल ग्रामों तथा गो-आधारित प्राकृतिक कृषि को बढ़ावा देने हेतु संबंधित विभागों एवं विशेषज्ञ संस्थानों के समन्वय से समयबद्ध कार्ययोजना तैयार कर उसका प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित किया जाएगा।

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