देश में होने वाला हर सार्थक बदलाव कुछ ताकतवर लोगों की वजह से नहीं, बल्कि आम लोगों के साथ आने से हुआ है- उमाशंकर पांडे

देश में होने वाला हर सार्थक बदलाव कुछ ताकतवर लोगों की वजह से नहीं, बल्कि आम लोगों के साथ आने से हुआ है- उमाशंकर पांडे

संवाददाता।

-पद्म श्री से सम्मानित उमाशंकर पांडे लखनऊ में आयोजित भारत ग्रामीण संगोष्ठी (इंडिया रूरल कोलोक्की) 2026 – उत्तर प्रदेश चैप्टर’ के छठे संस्करण में बोल रहे थे।

लखनऊ। पद्मश्री से सम्मानित और ‘जल योद्धा’ उमाशंकर पांडे ने आज लखनऊ में आयोजित ‘इंडिया रूरल कोलोक्की (IRC) 2026’ के छठे संस्करण को संबोधित किया। लखनऊ विश्वविद्यालय के सोशल वर्क विभाग में ‘ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI)’ द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम का विषय था,’ग्रामीण कल्याण सूत्रधार के रूप में महिलाएं (कमजोर समुदायों को साझा समृद्धि की ओर ले जाना)’।
नीति निर्माताओं, विचारकों और जमीनी स्तर के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए, पांडे ने सामूहिक प्रयास की ताकत पर ज़ोर दिया। अपने शुरुआती संबोधन में उन्होंने कहा, “जब आप बोलते हैं, मैं बोलता हूँ और हम सब मिलकर बोलते हैं, तभी दुनिया बदलती है।”

युवा उद्यमिता, ग्रामीण आजीविका और महिलाओं के नेतृत्व वाली उद्यमिता पहलों पर हुई पैनल चर्चाओं में कई गणमान्य व्यक्ति शामिल हुए। इनमें सर्वेश्वर शुक्ला (संयुक्त आयुक्त उद्योग, MSME और निर्यात संवर्धन विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार), प्रवीणा चौधरी (संयुक्त निदेशक, पंचायती राज विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार), रेनू मिश्रा (कार्यकारी निदेशक, एसोसिएशन फॉर एडवोकेसी एंड लीगल इनिशिएटिव्स ट्रस्ट AALI), संदीप गिरी (प्रोफेसर, सोशल वर्क डिपार्टमेंट,लखनऊ विश्वविद्यालय), पूर्णा रॉय चौधरी (चीफ फंक्शनरी और चीफ प्रोग्राम ऑफिसर, ट्रिकल अप इंडिया फाउंडेशन), सिद्धार्थ शंकर (डिप्टी जनरल मैनेजर, नाबार्ड) और हीरालाल (आईएएस, सचिव,राष्ट्रीय एकता विभाग, उत्तर प्रदेश सरकार) शामिल थे।

समावेशी विकास में उद्यमिता के महत्व पर बात करते हुए, सर्वेश्वर शुक्ला ने बताया कि ‘सीएम युवा योजना’ ने लगभग 2 लाख युवाओं को अपनी उद्यमिता यात्रा शुरू करने,विचारों को उद्यमों में बदलने और नौकरियां पैदा करने में सक्षम बनाया है।

भारत की विकास यात्रा में ग्रामीण विकास की अहम भूमिका पर ज़ोर देते हुए, उत्तर प्रदेश सरकार के राष्ट्रीय एकता विभाग के सचिव हीरालाल (आईएएस) ने कहा कि जब तक भारत के गाँव विकसित नहीं होंगे, तब तक देश विकसित राष्ट्र नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि केवल शहरी विकास से ‘विकसित भारत’ का सपना
पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए संतुलित और समावेशी विकास की ज़रूरत है, जो शहरों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं, संस्थाओं और समुदायों को भी मजबूत बनाए।
वर्ष 2016 में स्थापित ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI) ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर स्थानीय नेतृत्व पर आधारित समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहा है। वर्ष 2026 में अपने दूसरे दशक में प्रवेश करते हुए, TRI लैंगिक समानता पर केंद्रित अपने दृष्टिकोण को और मजबूत कर रहा है तथाये समुदाय-नेतृत्व वाले मॉडलों का विस्तार कर ग्रामीण भारत में समान और सतत विकास को आगे बढ़ा रहा है। यह वर्ष 2021 से वार्षिक ग्रामीण संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है।पूरा नहीं हो सकता। इसके लिए संतुलित और समावेशी विकास की ज़रूरत है, जो शहरों के साथ-साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं, संस्थाओं और समुदायों को भी मजबूत बनाए।

वर्ष 2016 में स्थापित ट्रांसफॉर्म रूरल इंडिया (TRI) ग्रामीण समुदायों के साथ मिलकर स्थानीय नेतृत्व पर आधारित समावेशी विकास को आगे बढ़ाने के लिए कार्य कर रहा है। वर्ष 2026 में अपने दूसरे दशक में प्रवेश करते हुए, TRI लैंगिक समानता पर केंद्रित अपने दृष्टिकोण को और मजबूत कर रहा है तथा समुदाय-नेतृत्व वाले मॉडलों का विस्तार कर ग्रामीण भारत में समान और सतत विकास को आगे बढ़ा रहा है। यह वर्ष 2021 से वार्षिक ग्रामीण संगोष्ठी का आयोजन कर रहा है।

वर्ष 2026 के चर्चा सत्र में तैयार की गई रूपरेखा को स्पष्ट करते हुए, TRI के एसोसिएट डायरेक्टर राजीव त्रिपाठी ने कहा, “ग्रामीण परिवर्तन की शुरुआत तब होती है, जब महिलाएं केवल परिवार की आधारशिला तक सीमित न रहकर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की निर्माता बनती हैं। उत्तर प्रदेश अध्याय में इस बात पर विशेष ध्यान केंद्रित किया गया कि स्वयं सहायता समूहों, सतत कृषि एवं जलवायु अनुकूल पद्धतियों के साथ-साथ स्थानीय ग्राम शासन में सक्रिय नेतृत्वकारी भूमिकाओं के माध्यम से महिलाओं को कैसे सशक्त बनाया जा सकता है, ताकि वे न केवल आर्थिक स्वतंत्रता का अनुभव कर सकें, बल्कि अपने समुदायों के उत्थान में भी महत्वपूर्ण योगदान दे सकें।”

वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि उत्तर प्रदेश ग्राम परिवर्तन के अगले केंद्र के रूप में उभर सकता है, जहां महिलाओं को संस्थागत नेतृत्वकर्ता और बाजार को प्रभावित करने वाली प्रमुख शक्ति के रूप में सक्षम बनाया जाए, ताकि वे स्थानीय व्यवस्थाओं को दिशा दे सकें और दीर्घकालिक खुशहाली लाएं। सत्रों में महिला-नेतृत्व वाले उद्यमों और उनके वित्तीय समावेशन को गति देने के लिए आवश्यक नीतिगत सुधारों, संस्थागत नवाचारों और साझेदारियों पर भी चर्चा की गई एवं ग्राम पंचायत स्तरीय स्वयं के आय की वृद्धि हेतु राउंड टेबल संवाद का आयोजन हुआ जिसमे स्वयं की आय से सम्बंदित प्रावधान, समस्या और समाधान पर चर्चा हुई जिसमे पंचायती राज विभाग से उप निदेशक (पंचायत) मनीष कुमार, प्रणव पाण्डेय, बृजेश श्रीवास्तव, उपायुक्त श्रम रोजगार ज्ञानेंद्र सिंह, सेवानिवृत अभिराम त्रिवेदी, लखनऊ विश्वविद्यालाय से अंजलि मिश्रा, सहभागी शिक्षण संस्थान से अशोक एवं प्रधान उपस्थित रहे।

उत्तर प्रदेश अध्याय का समापन विशिष्ट अतिथियों के विचारों के साथ हुआ, जिसमें दिनभर हुई चर्चाओं के निष्कर्षों को को संक्षेप में प्रस्तुत करते हुए राज्य में महिला नेतृत्व वाले ग्रामीण परिवर्तन को आगे बढ़ाने के लिए एक साझा कार्यसूची तैयार की गई।

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