राजधानी में मीना कुमारी और किशोर कुमार की जयंती पर सजे दो यादगार कार्यक्रम
संवाददाता ।
–मुंबई, दिल्ली सहित लखनऊ के आमंत्रित कलाकारों की मधुर आवाज़ों से देर रात तक गुलज़ार हुए लखनऊ के प्रेक्षागार
लखनऊ। राजधानी लखनऊ में संगीत, कला और तहज़ीब का अनूठा संगम एक बार फिर देखने को मिला, जब एक सप्ताह में दो भव्य सांस्कृतिक आयोजनों ने शहर के सांस्कृतिक वातावरण को सुरों और संवेदनाओं से सराबोर कर दिया। एक ओर सुप्रतिष्ठित संस्था “रंगभारती” ने महान गायक किशोर कुमार की जयंती पर आयोजित संगीतमय संध्या ने श्रोताओं को भाव-विभोर किया, वहीं दूसरी ओर “हेरिटेज ऑफ अवध” के अंतर्गत आयोजित ‘चलते चलते’ कार्यक्रम ने अदब, संस्कृति और संगीत की विरासत को जीवंत कर दिया।
किशोर कुमार जयंती पर भावभीनी संध्या
रविन्द्रालय,चारबाग में आयोजित “एक शाम किशोर कुमार के नाम” कार्यक्रम में फिल्म जगत के महान गायक एवं बहुमुखी कलाकार किशोर कुमार को उनकी जयंती के अवसर पर श्रद्धांजलि दी गई। सुविख्यात संस्था रंगभारती के बैनर तले सप्तरंग ऑर्केस्ट्रा की प्रस्तुति में लखनऊ सहित मुंबई, दिल्ली, कानपुर आदि से आमंत्रित नवोदित और प्रतिष्ठित कलाकारों ने किशोर कुमार के अमर गीतों को प्रस्तुत कर श्रोताओं का दिल जीत लिया। कार्यक्रम में शहर के संगीत प्रेमियों की बड़ी संख्या उपस्थित रही और पूरे वातावरण में सुरों की मधुर गूंज छाई रही।
वहीं दूसरी ओर “हेरिटेज ऑफ अवध” के अंतर्गत महान अदाकारा मीना कुमारी के जन्मदिवस पर आयोजित कार्यक्रम ‘चलते चलते’ में भी कला, संस्कृति और तहज़ीब का शानदार संगम देखने को मिला, जिसमें मीना कुमारी के जीवन और फिल्मों से जुड़े गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दी गईं।
इस अवसर पर अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त गायिका डॉ. जया श्रीवास्तव सहित कई प्रतिष्ठित कलाकारों ने अपनी प्रस्तुतियों से कार्यक्रम को यादगार बना दिया। दर्शकों ने तालियों की गड़गड़ाहट के साथ कलाकारों का उत्साहवर्धन किया।
कार्यक्रम में अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त दूरदर्शन एवं आकाशवाणी कलाकार डॉ. जया श्रीवास्तव ने अपनी सशक्त गायकी से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।चांद तन्हा है, हम तेरे प्यार में सारा आलम,चलते चलते यूं ही कोई मिल गया था, दुनिया करे सवाल और हमें और जीने की चाहत न होती जैसे सदाबहार गीत सुनाकर खूब वाहवाही बटोरी।
मनमोहक गीत, संगीत एवं नृत्य की प्रस्तुतियों ने अवध की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को जीवंत रूप में प्रस्तुत किया।
लखनऊ, जो अपनी नवाबी तहज़ीब और सांस्कृतिक समृद्धि के लिए जाना जाता है, ऐसे आयोजनों के माध्यम से अपनी पहचान को निरंतर सुदृढ़ करता रहा है।
दोनों ही आयोजनों में संगीत और कला प्रेमियों की भारी भीड़ देखने को मिली। आयोजकों ने बताया कि ऐसे आयोजनों का उद्देश्य कलाकारों को सम्मान देना और नई पीढ़ी को भारतीय संगीत और संस्कृति से जोड़ना है।
