उत्तर प्रदेश में प्रस्तावित चार दिवसीय ‘गो-टेक 2026’ को प्रदेश में गो-संरक्षण, तकनीकी नवाचार, प्राकृतिक कृषि और गो-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा देने वाले एक बड़े मंच के रूप में विकसित किया जाएगा

यह आयोजन अक्टूबर 2026 में प्रस्तावित है
लखनऊ। उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के सभागार, इन्दिरा भवन, लखनऊ में आयोजन की तैयारियों एवं रूपरेखा को लेकर महत्वपूर्ण बैठक हुई। बैठक की अध्यक्षता उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्ता ने की। बैठक में डॉ. वल्लभ भाई कथीरिया, पूर्व अध्यक्ष, राष्ट्रीय कामधेनु आयोग एवं पूर्व अध्यक्ष, गुजरात गोसेवा एवं गौचर विकास बोर्ड की गरिमामयी उपस्थिति रही। आयोग के मा० सदस्यों राजेश सिंह सेंगर, दीपक गोयल एवं रमाकांत उपाध्याय सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों एवं प्रतिनिधियों ने सहभागिता की।
बैठक में तय किया गया कि ‘गो-टेक 2026’ केवल एक आयोजन नहीं, बल्कि गौशालाओं, किसानों, वैज्ञानिकों, तकनीकी विशेषज्ञों, शोध संस्थानों, स्टार्टअप्स और उद्यमियों को एक मंच पर लाने वाला ज्ञान, तकनीक और नवाचार का साझा प्लेटफॉर्म होगा। इसका उद्देश्य सफल मॉडलों और तकनीकी समाधानों को साझा करने के साथ उन्हें बड़े स्तर पर लागू करने के लिए ठोस एवं परिणामपरक कार्ययोजना तैयार करना होगा।
गौ-टेक महोत्सव के पूर्व आयोजन अहमदाबाद, पुणे एवं जयपुर में किए जा चुके हैं। इसी क्रम को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष उत्तर प्रदेश में ‘गो-टेक 2026’ आयोजित किए जाने का विचार है। आयोजन के लिए गोरखपुर, झांसी, वृंदावन,अयोध्या अथवा लखनऊ में से किसी उपयुक्त स्थान का चयन किया जाएगा।
बैठक में गौशालाओं को संरक्षण केंद्रों से आगे बढ़ाकर ‘गो-आधारित ग्रामीण अर्थव्यवस्था’ के केंद्रों के रूप में विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया। गोबर से बायोगैस एवं स्वच्छ ऊर्जा, जैविक/प्राकृतिक खाद एवं अन्य उत्पादों के निर्माण के माध्यम से गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाने और
ग्रामीण रोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग विकसित करने पर चर्चा हुई।ग्रामीण रोजगार एवं उद्यमिता को बढ़ावा देने की दिशा में तकनीकी एवं संस्थागत सहयोग विकसित करने पर चर्चा हुई।
उत्तर प्रदेश में विभिन्न संस्थाओं एवं कंपनियों के माध्यम से 7,000 से भी अधिक बायोगैस संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। बैठक में इन प्रयासों को गौशालाओं और किसानों से जोड़ते हुए ऊर्जा, प्राकृतिक कृषि, मृदा स्वास्थ्य और ग्रामीण अर्थव्यवस्था के लिए एकीकृत मॉडल विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया गया।
उत्तर प्रदेश गो सेवा आयोग के अध्यक्ष श्याम बिहारी गुप्त ने कहा- “गो-टेक 2026 का लक्ष्य गोसेवा को आधुनिक विज्ञान, तकनीक और नवाचार से जोड़कर गोवंश संरक्षण को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नई शक्ति बनाना है। हम ऐसी आत्मनिर्भर गौशालाओं का मॉडल विकसित करना चाहते हैं, जहां गोवंश संरक्षण के साथ गोबर और गोमूत्र का वैज्ञानिक एवं आर्थिक उपयोग हो, स्वच्छ ऊर्जा और प्राकृतिक कृषि इनपुट का उत्पादन हो तथा युवाओं के लिए रोजगार और उद्यमिता के नए अवसर पैदा हों।”
डॉ. वल्लभ भाई कथीरिया ने कहा कि गो-आधारित गतिविधियों को विज्ञान, तकनीकी नवाचार, शोध और उद्यमिता से जोड़ना समय की आवश्यकता है। उन्होंने ‘गो-टेक 2026’ को व्यापक स्वरूप देते हुए देशभर के सफल गो-आधारित मॉडलों और तकनीकी समाधानों को एक मंच पर लाने का सुझाव दिया।
बैठक में इस व्यापक दृष्टिकोण पर भी विचार किया गया कि गोवंश और उससे प्राप्त दूध, गोबर एवं गोमूत्र का वैज्ञानिक एवं सतत उपयोग स्वस्थ जीवन, मृदा संरक्षण और पर्यावरणीय संतुलन की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है। बदलती जलवायु, मृदा क्षरण और पर्यावरणीय चुनौतियों के दौर में गो-आधारित प्राकृतिक एवं टिकाऊ समाधानों को बढ़ावा देना समय की महत्वपूर्ण आवश्यकता है। ‘गो-टेक 2026’ इसी सोच को विज्ञान, तकनीक और नवाचार के साथ जोड़ते हुए एक व्यापक जन-अभियान एवं कार्यमंच के रूप में आगे बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा।
‘गो-टेक 2026’ का व्यापक विजन है- गोवंश संरक्षण को प्राकृतिक कृषि, स्वच्छ ऊर्जा, मृदा संरक्षण, पर्यावरणीय स्थिरता, ग्रामीण स्वावलंबन और गो-आधारित उद्यमिता से जोड़कर उत्तर प्रदेश में एक सशक्त, सतत और आत्मनिर्भर गो-आधारित अर्थव्यवस्था का मॉडल विकसित करना।
